Tuesday, November 25, 2014

SPOUSE

जीवन संगिनी,
क्या छुपा है तुमसे,
मेरी हर मंजिल अनवरत तेरी  काया,
तुम बिन जीवन सुना है,
सरल सा जीवन कठिन हो चला ||


 जीवनसंगिनी,
तुम बिन सब सुना, 
पुष्प भी काँटों से लगते, 
कलियाँ कठोर होती,
मन को कचोटती,
विरह के गीत,
सरोवर की मंद वेग में,
घिर आये मेघ से वंदन 

हे मेघ,
कालिदास की विरह,
मेघ दूत बन,
जीवनसंगिनी को,
मेरे कुशल होने का ,
आभास दो,
विरह वेला में जलते,
मन में खलीपन लिए,
तेरी कामना में,
तेरे इंतजार में,
बस तुम्हारा.....



"श्री"

2 comments:

  1. प्रेम का आभास खुद ही हो जाता है म्र्घों के सहारे की जरूरत कहाँ रहती है ...

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  2. धन्यवाद आपके कमेंट के लिए

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