Tuesday, July 7, 2020

किस्मत ए जिंदगी

क्यों याद आ जाती हो 
किस्मत के थपेड़ों को 
फिर घर कर जाती हो 
अंधेरी गलियारों को 

राहें तब भी अलग थी 
आज भी अलग ही हैं 
इन राहों में राहें 
क्यों तलाशती हो आखिर 

मंजर अलग थे अलग हैं 
अलग हो गए शायद 
मंजिल एक थी एक है 
और एक रह रह गयी आखिर

दुनिया लकीरों की 
मोहताज थी 
जो आज हकीकत
हो गयी आखिर

तलाश तुम्हारी थी आज भी है 
पूरी हो न पाएगी 
अधूरा इश्क था अधूरा है 
अधूरा रह गया आखिर

Friday, March 6, 2020

Holi

होली और फाग महीना केवल तुम हो याद 
लगा रंग उन बालों में फिर गुलाबी से गाल 
जोगी रा सारा रारा....

अधूरा रह गया प्यार आजकल 
अधूरी तेरा इकरार 
मिली मोहब्बत दूजे से 
तुम रह गई दीवाने काश 
जोगीरा सारा रा रा .....

मुझे नौकरी रास न आयी 
रास न आई पगार 
जिस कालेज में नालेज नहीं 
टारगेट रह गई बात 
जोगिरा सारा रा रा 

नौकरी छोड़ी बिजनेस कर लिए 
बन गए सब के बॉस 
जब लड़के हो काम से गायब 
फिर याद आई औकात 
जोगी रा सारा रा रा 

Wednesday, November 27, 2019

वादा

जज्बात है जिद भी तेरा सहीं 
बस उस कोने के आँसू मेरे खाते
तुम जिंदगी को रह रह कोसती
आज अकेलापन मेरे खाते 

किस्मत अधूरी कहानी अधूरा 
अधूरा जीवन ख्वाब अधूरा 
सब घर उजियारी अंधेरा मेरे खाते 
जीवन का हर शौक इबादत 
मजहब मोहब्बत मेरे खाते 

Thursday, September 19, 2019

सँगनी

चलो,
यादों की तश्वीर बनाएं,
कुछ गुनगुनाएं,
एक नई सरकार बनाएँ,
तुम और हम फिर सपने देखें,
और उसे हकीकत बनाएं,
थोड़े गम मिल कर फरमाएं,
थोड़ी खुशियां साथ समेटे जाएं

Monday, September 9, 2019

Adura40

ख्वाहिश आज मुमकिन है,
संजीवनी समय लेकर
वक़्त ठहरा गया।
जहाज़ भी चाँद पर मिल गया ।

मुस्तक़िल की तुमभी
कायनात की अधूरी कहानी
हम भी विक्रम से
निहार रहे अपने चाँद को
मोहब्बत में

बस उम्मीद की
तुम साथ दोगी
निभाओगी
उन कसमों को हमारी
आज हम भी चन्द्रयान से
अकेले हैं तुम्हारी आवाज़
सुनने को बेकरार

तुम भी उस चाँद सी
सख्त न रहो
बहुत दूर चलें आए हैं
अपनी सरज़मीं छोड़कर
कुछ तो इजहार करो
कुछ दिन की जिंदगी बच गयी
थोड़ा जी लेने दो
मुझे तुम्हारी जमीन
में थोड़ा टहल लेने दो ।।

श्रीराधे39


मेरी श्रिष्टि मेरी मुरलिया
सब कुछ राधे राधे है ।
जी लिया हर पल जीवन का
हर पल राधे राधे है ।

पल पल यादों की अमृत
जीवन ये राधे राधे है
हर साँस तेरी हर याद तेरी
तन मन राधे राधे है ।

मेरी पूंजी ,मेरी कुंजी ,
तर्पण राधे राधे है ,
ऋतु सावन की ,
तेज फुहारें ,
तुम बिन राधे राधे है ।।
 
क्या साथ आया,
क्या छोड़े रहे  ,
जीवन ये राधे राधे है ।।
तुम जीवन हो
तुम गीता हो
स्मृतियाँ राधे राधे है ।।

श्री

Monday, August 12, 2019

मोहबब्त पूर्ववत 38

उम्रे तकरार में ,
धुंधली मोहबब्त के किस्से,
कसमें वादे यादें ,
बस शिकवे से रह जाते हैं ,
शिकायत जिंदगी ,
तलाशती है  यादों की चादर में
अनुभव बिजली सी,
वो सावन याद आती है ,
घटा जब झूम उठती है,
यादें बेचैन पड़ते है,
मन फिर मौन होते हैं ,
सरहद याद आती है,
फर्क मोहबब्त का
रह गया आख़िर,
कोई निभा जाता है ।
तो कोई तोड़ जाता है ।

श्री