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Tuesday, October 24, 2017

मोहब्बत#2

तुम तुम हो गयी,
मैं मय हो गया ।।

कभी अधरायी सी ,
मोहब्बत स्वर हो गयी ।।
तुम तुम हो ...…....

यकीन फ़िर,
आज पत्थर हो गया ।।
उम्मीद सारी,
ओझल ओस हो गयी ।।

अलसायी सी प्यास,
जख्म हो गयी ।।
नासूर सी तलब ,
बेखबर हो गयी ।।

तुम तुम हो .....

"श्री"

Monday, February 22, 2016

पडाव#शेर

गुलजार होगी
सुबह फिर
तुम्हारी यादों के साथ
एक पल साथ जी लो
वजह साफ़ होगी
जीने के लिए आज ।।

मेरे अरमानो का यही फलसफा होगा ।।
ता उम्र यादें इन्तजारे इंतजा होगा ।।

कुछ गुस्ताखियाँ अनजाने,
वो कर लिया करते हैं ।।
मोहब्बत इसी से हम,
उम्र भर कर लिया करते हैं ।।

जब मिलते हो तो लम्हा सा लगता है
आज महसूस हुआ की जमाना बदल गया।।

जाओ तुम बिन जी लेंगे
बिन साँस ही रह लेंगे
जो लम्हें साथ गुजारे
उनकी माला पिरो लेंगे ।।

इन्तजार में आप की ,रो लिए दो बूंद भर
जब मुलाक़ात हो, कीमत वसूल लेंगे ।।

कभी फुर्सत में देख कर मुस्कुरा लिया करो,
थोड़ी खुशियाँ दिन की थकां मिटा देती है ।।

तेरी तस्वीर आज मेरा आइना होंगी ,
शायद उन्ही आँखों से तुम्हे निहार लेंगे ।।

Tuesday, December 15, 2015

कागज में जिन्दगी

शायरी

Thursday, July 2, 2015

मुस्कान

किताबों के पन्ने
पलट रहें हैं ग़ालिब
कुछ समझ में आए
कोई समझा गया ।।

तेरी अमिरिय्त की तारीफ करता हूँ ग़ालिब
जब तक गरीब था जवाब ढूंढ़ता था
आज आमिर हूँ सवाल ढूढ़ता हूँ ।।

वक्त से पहले किस्मत भी नही मिलती ग़ालिब
लोग यूँ ही किस्मत को कोसते हैं ।।

वक्त मजधार में
आज हम पुरानी शामें
याद करते हैं
हम हैं मुसाफिर ग़ालिब
तेरा दीदार याद करते हैं ।।

मजहबियों से मेरा यकीन खाक हो चला
आज मेरा दोस्त  मुसलमान हो चला ।।

ग़ालिब जमाने को हमारी परवाह नही
हम तो यूँ ही कतल पे क्त्ल किये जाते हैं ।।

तेरे न होने पे मेरा तिरंगा भी रो गया ग़ालिब
तेरी मुस्कान पे हिंदुस्तान नजर आया ।।
अब्दुल कलाम जी के लिए

ये तूफान के आने की सुगबुगाहट है ग़ालिब
अभी न सम्हले तो डूब जाओगे

काफिला यूँ चला
मै फिरता रहा जमाने में
दै हो दरम के लिए
जब मिला अपनों से
गुलिस्तान नजर आया ।।

तेरे न होने पे मेरा तिरंगा भी रो गया ग़ालिब
तेरी मुस्कान पे हिंदुस्तान नजर आया ।।
कलाम साहब के लिए दो शब्द ।।

Wednesday, November 23, 2011

INTENTION

                                                                 आरजू

है बस मेरी एक ख्वाहिश,
रब से ज्यादा पूजने कि ख्वाहिश,

बोली तून तोडी मुझसे, आशा का दीप चुराया है | 
मिले तुझे सब दुआ करूँ  मै,
जो अब तक ना मिल पाया है | 
तमन्ना है बस खुश रहे तू,
                                                         सारा जीवन तुझ पर वारा है |

                                                               श्रीकुमार गुप्ता






Tuesday, July 26, 2011

LIFE WITHOUT YOU

कैसे जीये तेरे बगैर

तू  बन्दगी, तू जिन्दगी
तू प्यार भी, तू हार भी ||
कभी करुणा में, कभी गीत में,
कभी कस्तियो के संगीत में ||
                                             कैसे जीये तेरे बगैर..............
कभी पीडा में, कभी पूजा में,
कभी श्रद्धा रुपी पुष्पो में ||
कभी आहटो कि चिलम में,
कभी शान्त यौवन फ़लक् में || 
                                             कैसे जीये तेरे बगैर..............

                                                         श्रीकुमार गुप्ता

Saturday, June 18, 2011

LOVER NEVER DIES

नयन दरस......

नयन दरस तरसे मोरे  नयना,
प्रीत कि आस लगाये तोसे नयना ||


आहट सुन कहती अन्धियारी , 
तुम बिन क्यो तरसु दिन रैना || 

छायो चन्चल रैन बेचारी,
नयन निर खेलत अटखलिया ||  

क्यो कलियन को छेडत नहि,
भौरो कि गुन्ज करे क्यो चैना ||

Friday, March 4, 2011

MEMORIOUS MOMENTS#19

पल दो पल कि, गुमसुम यादें

कुछ अनजाने  ,कुछ पहचाने
आँखों कि सुन्दर दृष्टि 
फलकों कि आभा संग बिखरी  ||
जाने क्यों है मचलता रे मन ||
जाने क्यों है मचलता रे मन || {1}

निःस्वार्थ  , निर्लभ् , निरुपम , नित्य 
अविरल , अपलक , अनन्त , अनिल 
जाने क्यों है आकर्ष  रे मन
जाने क्यों है मचलता रे मन ||
जाने क्यों है मचलता रे मन || {2}


यादों कि वो सुन्दर क्यारी ,रँग भी रँगे फूलों वाली 
जाने क्यो है सिंचित रे मन , जाने क्यो है सिंचित रे मन
जाने क्या है आज हृदय में ,आँखों के अनमोल पलक में
दो मोती जो सागर के से ,निकल आये हो मन मन्थन से 
जाने क्यों है विचलित रे मन 
जाने क्यों है मचलता रे मन ||
जाने क्यों है मचलता रे मन|| {3}

फिर भी कहता साथ है तेरे  ,साथ  है तेरे, याद में तेरे
उसे कौन ले सकता रे मन ,उसे कौन ले सकता  रे मन
साथ दिया था , साथी बनकर ,अपना कहा उसे रिस्ता देके
दिया बुझ गया आज हृदय से ,लेकिन क्यों है जलता रे मन ||
लेकिन क्यों है जलता रे मन ||
जाने क्यों है मचलता रे मन ||
जाने क्यों है मचलता रे मन|| {4} 


Monday, March 29, 2010

शायद कभी #8

शायद कभी .............
शायद कभी .............


शायद कभी वो पल ना आता, 
जीवन का वो कल ना आता,
रुला रुला मरहम न भरता , 
दिल मे मेरे गम ना भरता ।

जिंदगी जन्नत वो करके ,
जिंदगी से आ लडी थी,
मुझ को तो लगता था जैसे , 
जन्मों कि बिछ्डी मिली थी |

बातों मे खोया हुआ , 
लगता था कोई अपनी मिली थी,
लगता था जादुई छडी थी ,
दिल मे मेरी आ पडी थी |

आँसुओं कि वो लडी थी , 
जाने कैसी वो घडी थी,
बात करना भूल कर वो, 
देख कर भी चुप खडी थी |

दिल मे तो गम का था साया, 
आंखो मे शर्मिंदगी थी,
लगता था मेरे लिए वो, 
अंबर तल पर आ खडी थी | 

पल दो पल कि खुशियाँ देकर, 
जाने क्यो गुमशुम खडी थी,
जिंदगी जन्नत वो करके , 
जिंदगी से आ लडी थी |

भूल कर रिश्ते वो नाते, 
पत्थरों सी वो खडी थी,
जाने कैसी वो घडी थी , 
रुठ कर बिछ्डी चली थी ।

"श्री"