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Wednesday, December 30, 2015

नया वर्ष#14

बहुत बेचैन है ये दिल,
इस सर्द रात में ,
कल नींद खुलेगी फिरसे,
नये साल में ।।

यूँ वादे बहुत किये
बीते साल में ,
कुछ बदलेंगे अपने आप को,
नये साल में ।।

कुछ पिछली बात सुनाता हूँ ,
दिल के जज्बात बताता हूँ ,
महीनों गुजर गये ,
फिर आया नव वर्ष,
क्या होगा फिर से बदलेगी बुनियाद,
नये साल में।।

तमाम कोशिशें फिर जवां हो उठी,
सुनहरे समने फिर से झिलमिल हो,
चलो बदलने चले अपने से अपने को,
इस नये साल में ।।

कुछ गलती जो जी लिए ,
अनुभव की मोती लिए,
न दोहराएंगे इस साल में,
चलो मनाए नव वर्ष इसी आस में ।।

"श्री"