कभी सपनों का महल ,तो कभी आंसुओं की फरियाद है | कभी रेत की ढेर सी खामोश ,तो कभी पेड की छाँव है ये जिंदगी || कभी गीता की पाठ ,तो कभी कुरान की आयात है | एक कारवाँ सपनों का बागबाँ ,तो कभी माझी की नैया और पतवार है ये जिंदगी || कभी काँटों का दामन , कभी जश्ने बहार है| शांति की वीणा ,तो कभी लहू की ललकार एक आवाज़ है ये जिंदगी || कभी ममता की छाँव कहीं ,तो कभी करुणा की तस्वीर है | आने वाले जीवन की, अनुभवों की गीत है ये जिंदगी || -श्रीकुमार गुप्ता
Saturday, February 19, 2022
फगुनिया
Saturday, February 5, 2022
आईना
ख्वाब की परी
यूँ ही हम अक्सर ,
एक ख्वाब से ,
मंजिल की तलाश में
एक नाव से
अधूरे अधूरे अहसास से
अधूरे अधूरे कहानीकार से
एक मंच दो कलाकार से
कहानी के अलग किरदार से
थकान में , जरूरत में
पास पास से ,
उजियारी अंधियारी दुनिया में
साथ साथ से
नदी में किनारों में
साथ साथ से
एक दुआ एक अहसास में
साथ साथ से
Monday, January 17, 2022
मंजिल की मियाद
Tuesday, July 7, 2020
किस्मत ए जिंदगी
Friday, March 6, 2020
Holi
Wednesday, November 27, 2019
वादा
Thursday, September 19, 2019
सँगनी
चलो,
यादों की तश्वीर बनाएं,
कुछ गुनगुनाएं,
एक नई सरकार बनाएँ,
तुम और हम फिर सपने देखें,
और उसे हकीकत बनाएं,
थोड़े गम मिल कर फरमाएं,
थोड़ी खुशियां साथ समेटे जाएं