Sunday, March 21, 2010

बचपन #1(OLDEN DAYS WAS GOLDEN DAYS )1


बचपन

एक लम्बी सांस,
और धूप कि रानी,
घंटों जीवन,
अजब कहानी।

वो मिट्टी के घर,
और कंचा लडाई,
लम्बे - लम्बे रास्ते,
और अपनी सवारी ।

कभी यारों कि यारी,
कभी खूब लडाई,
अपने घरौंदे
प्यार कि निशानी।

वो होली की रंगत,
और दिपों की थाली,
थोड़े से पैसे ,
और खूब उधारी।

मिठी मिठी यादें,
अब लम्बी कहानी,
मंदिर कि पूजा,
और पूजा कि थाली।

वो मिठी सी यादें,
अब लम्बी रुआंसी,
ये निर्जल आँसू,
 अब प्यारी कहानी।
श्रीकुमार गुप्ता

No comments:

Post a Comment