Tuesday, September 15, 2015

इंजिनियर डे

देश की शान है वो,
देश की आन है वो,
हँसकर सहता,
मुश्किल राह चुनता,
फितरत बदलती नही,
पर देश की किस्मत बदलता,
एक इंजिनियर है वो ।।

रात को देर तक मस्ती करता,
दोपहर बिन खाए पूरी ड्यूटी करता,
सपने सजाता पेरिस के,
और खुली छत बिन पंखे सोता,
एक इंजिनियर है वो ।।

कठनाइयों से तो कठिन डगर थी,
50 final exam पास करने की सफर थी,
ले लो बाबा जी की नौकरी जो मिल गयी,
फिर भी अपनी हस्ती बनाता,
एक इंजिनियर है वो ।।

मिसाइल हो या कंप्यूटर प्रोग्राम,
ट्रेन हो चाहे मोबाइल ए पैगाम,
ऊँची इमारतें हो या स्पेस लेब,
आधे दिन बिना नहाये जाता,
किस्मत की धुरी मिनटों में गिनता,
पूरी धरती के सपने सच करने चला,
एक इंजिनियर है वो ।।।

"श्री"