Thursday, April 16, 2015

जरूरत

दिए मन्नतों के,
जलाते रहिए,
कुछ देर के लिए ही सहीं,
अँधेरे मिटाते रहिए,
बड़ी रँगी है ,
ये जिन्दगी,
अपनी नाव दरिया में,
चलाते रहिए ||

जब चलता हूँ भोपाल की झीलों के किनारे,
अरपा का वो किनारा याद आता है,
जिस राह पर छोड़ आया हूँ अपनी जिन्दगी,
वो बसेरा याद आता है ||

लाख सितम हो मोहब्बत में श्री
जेब में अगर पैसे न हो तो सितम गहरा होगा ||

हम चुप रहते हैं
दुनिया से कभी न कहते हैं
कभी आओ फुर्सत से बैठो
जानोगे इतनी सिद्दत से तुम्हे याद कैसे किया करते है ||

तेरी महफिल सुनी आज भी है ,
चाहे दिए कितने भी रोशन क्यों न हो,
दिल में अंधियारी आज भी होगी,
तेरी बेवफाई का सिला ही कहलो,
कल तक तजुर्बे लिया करते थे,
आज दिया करते है ||


कौन कहता है मोहब्बत नही बिकते दोस्त,
मैंने अमीरों के दरबार में मोहब्बत को नाचते देखा है || 

1 comment:

  1. वाह .. बहुत ही खूबसूरत एहसास ... मन्नतें जरूर पूरी होती हैं .. उम्मीद का दिया जलते रहे बस ...

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