Monday, March 15, 2010

THE BURNING PERSON

जब खुशियों से सब जलते हैं ......

किसको समझे हम अपना,
जब खुशियों से सब जलते हैं ||


किसी के खातिर खून बहा कर ,
हेय में खुशियाँ भरतें हैं |
और किसी को देख ख़ुशी में,
ज्वाला से हम जलते हैं ||


टीसुओं से कर मोह्भ्रमित,
जब कर्त्तव्य निर्वहन करते हैं |
और किसी के खेल हेय से,
पंछी के पर उड़ते हैं ||

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