Sunday, November 21, 2010

बनना था मोती मुझको.....

बनना था मोती मुझको ,
एक सीप कभी न बन पाया ||

वो रक्तिम  सी  पर नीर  सही,
पर रक्त कभी न बन पाया ||
                                बनना था मोती मुझको.....

एक ज्वाला सी ये दुनिया है |
मै आग कभी न बन पाया ||
                                बनना था मोती मुझको.....

3 comments:

  1. "वो रक्तिम सी पर नीर सही,
    पर रक्त कभी न बन पाया ||"

    gehre bhaavo ka prastut karti panktiyaan,
    bahut badhiya...

    kunwar ji,

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  2. मैंने अपना पुराना ब्लॉग खो दिया है..
    कृपया मेरे नए ब्लॉग को फोलो करें... मेरा नया बसेरा.......

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