Thursday, June 26, 2014

EXHILARATION

ये है जिन्दगी  कि ज़िंदादिली  ||  

रास्तों  कठनाईयो से लडकर गुजरना,
हाँ मुश्किल है मगर गिर कर फिर से आगे बढना,
गुन्जाईस हो  तो दम भर फिर  से  मन्जिल कि ओर बढ चलना, 
ये है जिन्दगी  कि ज़िंदादिली  || 


ठोकर खाकर फ़िर् से अपने आगे मन्जिल कि सुग्बुगाहट सुनना,
राहगीर बन फ़िर् से मस्त हो आगे बढना,
कुछ कठिन कुछ सरल रास्तों पर,
अपनी तकदीर के काँटें  खुद सहना,
ये है जिन्दगी कि ज़िंदादिली   ||

अफ़सोस हो कर भी अपनी मर्जी पे अफसोस  ना करना,
भँवरा  बन अपनी मन्जिल  कि  लय समझना,
अपनी हार को भी जीत बना गीत बुनना, 
लोगो के तानों पर भी,
अपनी कस्ती कि सवारी करना,
ये है जिन्दगी कि ज़िंदादिली  ||

                                              श्री कुमार गुप्ता 



1 comment:

  1. ये जिन्दादिली कायम रहे ... आमीन ...

    ReplyDelete