Saturday, November 26, 2016

You

जिंदगी इशरत में
एक ख्वाब देखा
जागती आँखों में
संसार देखा
कवायद थी
इन्तहा की हद थी
इस हद में
जिंदगी को
गुलजार देखा
आंसू की मोती
आँखों में लिए
मोहब्बत का
मुमताज देखा
शायद इन आँखों ने
तुझमे अपना
संसार देखा

हूनर तेरे मोहब्बत का
कशिश मेरी होगी
आँखें तेरी पर
मोहब्बत मेरी होगी
कभी सुकून से देख
लेना तस्वीर अपनी
चेहरा तेरा
निगाहें मेरी होंगी ।।

फिर यकीन होगी
मोहब्बत की आरजू
तड़पना शायद
पड़ेगा उम्र भर यूँ ही
शिकायत नही
इबादत है
खुदा से फिरभी
तुम फिर भी हो
जरूरत मेरी

मेरे अलफ़ाज़ में मेरी मोहब्बत को पहचान लेना
थोड़ा समझ लो तो अलफ़ाज़ मोहब्बत होंगे ।।

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