Saturday, February 13, 2016

Valentine's day अरदास

निशा की ये करवट,
आज फिर मीठी यादें,
दोहराती है ।।
तुम ही रहोगे,
कल भी आज भी ,
ये अंजाम चाहता हूँ ।।
न दौलत न खुदा चाहता हूँ ।।
तुझ में अरदास मांगता हूँ ।।

बिखर गयी,
वो गुलाब की पंखुडियां,
तेरे वजूद का
अहसास देती,
न खुदा न इबादत चाहता हूँ ।।
तुझमे तुझे चाहता हूँ ।।

फिर भी तुमसा,
ये जहाँ लगता है,
न परवाह
जमाने की ,
मै वो शामें ,
दोहराना चाहता हूँ ।।
तेरी कस्ती का,
पतवार होना चाहता हूँ ।।

तेरी बेबसी थी,
या जमाने का भ्रम,
आज उन यादों को,
सजा रहा हूँ ,
मै फिर से ,
तेरी यादों में तुझको,
पाना चाहता हूँ ।।
मै तुझको अपना,
रब बनाना चाहता हूँ ।।
श्री

Thursday, January 7, 2016

भोपाली शायर


मस्वरें काफी दिए ता जिन्दगी  उसने
एक जमाना उनकी याद में खाली छोड़ आये हैं ।।

क्या अदब जिन्दगी है ग़ालिब
तुम बेदर्द मेरी तकलीफें पहचानते हो ||

गुजर जाती है जिनकी याद में
पूरी जिन्दगी टूट कर
और अधूरी बात है
की कभी पूरी न हुई ।।

"श्री"

Wednesday, December 30, 2015

नया वर्ष#14

बहुत बेचैन है ये दिल,
इस सर्द रात में ,
कल नींद खुलेगी फिरसे,
नये साल में ।।

यूँ वादे बहुत किये
बीते साल में ,
कुछ बदलेंगे अपने आप को,
नये साल में ।।

कुछ पिछली बात सुनाता हूँ ,
दिल के जज्बात बताता हूँ ,
महीनों गुजर गये ,
फिर आया नव वर्ष,
क्या होगा फिर से बदलेगी बुनियाद,
नये साल में।।

तमाम कोशिशें फिर जवां हो उठी,
सुनहरे समने फिर से झिलमिल हो,
चलो बदलने चले अपने से अपने को,
इस नये साल में ।।

कुछ गलती जो जी लिए ,
अनुभव की मोती लिए,
न दोहराएंगे इस साल में,
चलो मनाए नव वर्ष इसी आस में ।।

"श्री"