Thursday, September 19, 2019

सँगनी

चलो,
यादों की तश्वीर बनाएं,
कुछ गुनगुनाएं,
एक नई सरकार बनाएँ,
तुम और हम फिर सपने देखें,
और उसे हकीकत बनाएं,
थोड़े गम मिल कर फरमाएं,
थोड़ी खुशियां साथ समेटे जाएं

Monday, September 9, 2019

Adura40

ख्वाहिश आज मुमकिन है,
संजीवनी समय लेकर
वक़्त ठहरा गया।
जहाज़ भी चाँद पर मिल गया ।

मुस्तक़िल की तुमभी
कायनात की अधूरी कहानी
हम भी विक्रम से
निहार रहे अपने चाँद को
मोहब्बत में

बस उम्मीद की
तुम साथ दोगी
निभाओगी
उन कसमों को हमारी
आज हम भी चन्द्रयान से
अकेले हैं तुम्हारी आवाज़
सुनने को बेकरार

तुम भी उस चाँद सी
सख्त न रहो
बहुत दूर चलें आए हैं
अपनी सरज़मीं छोड़कर
कुछ तो इजहार करो
कुछ दिन की जिंदगी बच गयी
थोड़ा जी लेने दो
मुझे तुम्हारी जमीन
में थोड़ा टहल लेने दो ।।

श्रीराधे39


मेरी श्रिष्टि मेरी मुरलिया
सब कुछ राधे राधे है ।
जी लिया हर पल जीवन का
हर पल राधे राधे है ।

पल पल यादों की अमृत
जीवन ये राधे राधे है
हर साँस तेरी हर याद तेरी
तन मन राधे राधे है ।

मेरी पूंजी ,मेरी कुंजी ,
तर्पण राधे राधे है ,
ऋतु सावन की ,
तेज फुहारें ,
तुम बिन राधे राधे है ।।
 
क्या साथ आया,
क्या छोड़े रहे  ,
जीवन ये राधे राधे है ।।
तुम जीवन हो
तुम गीता हो
स्मृतियाँ राधे राधे है ।।

श्री

Monday, August 12, 2019

मोहबब्त पूर्ववत 38

उम्रे तकरार में ,
धुंधली मोहबब्त के किस्से,
कसमें वादे यादें ,
बस शिकवे से रह जाते हैं ,
शिकायत जिंदगी ,
तलाशती है  यादों की चादर में
अनुभव बिजली सी,
वो सावन याद आती है ,
घटा जब झूम उठती है,
यादें बेचैन पड़ते है,
मन फिर मौन होते हैं ,
सरहद याद आती है,
फर्क मोहबब्त का
रह गया आख़िर,
कोई निभा जाता है ।
तो कोई तोड़ जाता है ।

श्री

Wednesday, July 10, 2019

गजल ए तकरीर41

अब मुमकिन नही फिर भी अल्फ़ाज़ कह जाता हूं ।।

गजल ए तकरीर

ए जिंदगी  ए पीर मुझे मेरा मौला दे दे ,

गुजरा वक़्त का किरदार नया सा दे दे ,

तेरे जन्नत का नही शौक कबूल मुझको ,

मुझे किरदार मेरा इश्क पुराना दे दे ।।

वक़्त की धूप में होती है ताकत नई,

मुझे मेरी शौक की दौलत दे दे,

अधूरा इश्क रह गया था प्याला बन कर,

उस प्याले को अधूरा ही पी लेने दे ।।

फिर कुछ देर गुनगुनाने दे ,

उनके चेहरे पे फिर खो जाने दे ,

मयस्सर नही मुझे जमाना खारिज,

इस जमाने में फिर दौर पुराना दे दे ।।

Monday, July 8, 2019

नसीहत 42

क्यों याद आ जाती हो
किस्मत के थपेड़ों को
फिर घर कर जाती हो
अंधेरी गलियारों को

राहें तब भी अलग थी
आज भी अलग ही हैं
इन राहों में राहें
क्यों तलाशती हो आखिर

मंजर अलग थे अलग हैं
अलग हो गए शायद
मंजिल एक थी एक है
और एक रह रह गयी आखिर

दुनिया लकीरों की
मोहताज थी
जो आज हकीकत
हो गयी आखिर

तलाश तुम्हारी थी आज भी है
पूरी हो न पाएगी
अधूरा इश्क था अधूरा है
अधूरा रह गया आखिर च

Sunday, July 7, 2019

याद ए भोपाल

भींगी बरसात में चाँद को निहारते ,
फिर बारिश और झील का किनारा ,
कितना मधुर था वो रेस्टोरेंट का गाना ,
आज फिर घटा है सावन की ,
चलो बड़ी झील पे गुनगुना लेते हैं ,
कुछ आराम के पल इस जद्दोजहद,
की जिंदगी में फरमा लेते हैं ,
जब ये पल न होंगे तो ,
फिर शायराना कल याद करेंगे ,
जब कुछ पल मिल जाएंगे तो ,
फिर जिंदगी आबाद करेंगे ,
फिर आने की फरियाद ,
तुम्हे याद करेंगे ।।

श्री