Monday, February 22, 2016

पडाव

गुलजार होगी
सुबह फिर
तुम्हारी यादों के साथ
एक पल साथ जी लो
वजह साफ़ होगी
जीने के लिए आज ।।

मेरे अरमानो का यही फलसफा होगा ।।
ता उम्र यादें इन्तजारे इंतजा होगा ।।

कुछ गुस्ताखियाँ अनजाने,
वो कर लिया करते हैं ।।
मोहब्बत इसी से हम,
उम्र भर कर लिया करते हैं ।।

जब मिलते हो तो लम्हे सा लगता है
आज महसूस हुआ की जमाना बदल गया।।

जाओ तुम बिन जी लेंगे
बिन साँस ही रह लेंगे
जो लम्हें साथ गुजारे
उनकी माला पिरो लेंगे ।।

इन्तजार में आप की ,रो लिए दो बूंद भर
जब मुलाक़ात हो, कीमत वसूल लेंगे ।।

कभी फुर्सत में देख कर मुस्कुरा लिया करो,
थोड़ी खुशियाँ दिन की थकां मिटा देती है ।।

तेरी तस्वीर आज मेरा आइना होंगी ,
शायद उन्ही आँखों से तुम्हे निहार लेंगे ।।

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