Thursday, March 3, 2016

इंतजा

आज फक्र है उन्होंने हमसे बात की
जिनकी इबादत करते थे रोज
उसने मुस्कुरा कर बात की
तकदीर सिमट गयी आँखों में
जब नजरों से अरदास हुई ।।

गुजर जाएगा ये वक्त भी,
अँधेरे का इन्तजार मत कर ।।
गम बहुत हैं दुनिया में ,
मरने का इन्तजार मत कर ।।

आज कुछ देर यूँ लगा,
मानो तुम फिरसे,
उन्ही आँखों से निहारती हो,
अंगड़ाईयाँ मानो थपकी देकर जगाती,
और तुम सपनों से ऒझ्ल हो जाती हो,
क्या पता शायद मै हूँ या वहम,
फिर भी न जाने क्यों,
हर दस्तक पे दिल कचोटता है,
तेरे न होने पे हर बार रोता है,

मायूस हूँ थोडा ,
बेबसी साथ रखता हूँ ,
जेबकतरे बहुत है बाज़ार में ,
तुम्हे दिल के पास रखता हूँ ,
इन साँसों का जाने कब तक साथ ,
दिल में आज भी तस्वीर साथ रखता हूँ ।।

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