Wednesday, August 10, 2016

गिरगिट

आज लोग बदल गए,
वक्त की रफ्तार कहो,
या मौसम का रुख,
की लोग बदल गए ।

जिन्दगी की गफलत में,
अपनी दुनिया पियोए ,
आँसुओं के बोझ में ,
चेहरे झुलस गए ,
की लोग बदल गए ।

कल तक वफा की बात थी ,
अब जिद हो चली ,
कभी वक्त था की साथ बैठे ,
आज वक्त नही की साथ बोलें,
ये बिसात हो गयी तलब जिन्दगी,
की साथ हम साथ तुम हो गए,
आज लोग बदल गए ।

वक्तसर यूं,
खामोश न रहो,
हिम्मत हो तो,
सच भी कहो,
न मौसम न हवाएं बदली,
न ये वक्त न नियत बदली,
शायद किसी की,
कीमत बदल गयी,
और थोड़े वो बदल गये,
आज लोग बदल गए ।।

यूँ ही तुम भी रोओगे,
हम भी रोएंगे,
तुम जज्बात से,
हम अलफ़ाज़ से,
तुम कुछ तड्पोगी,
थोड़े हम भी तड़प लेंगे,
फिर भी तुम न बदलोगे,
न हम बदलेंगे ,
इन अलफ़ाज़ में शायद,
किसी का दिल जलेगा,
और शायद अल्फाजों में,
वो न बदलेगा,
की लोग बदल गए ,
पर वो न बदलेगा।
पर वो न बदलेगा ।।

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