तेरी सुभृत को आज ,
सीने से लगा लूँगा ,
तुम किसी की हो ,
तुम्हे अपना ही मानूँगा ।।
इनायत तेरी आँखों में
मोहब्बत देखी,
आइना दिल साफ में,
इबादत देखी ।।
एक राही था मै,
खाकसार बन गया,
जीने की वजह पे ,
तेरा तलबगार बन गया ,
कल तक काफिर था ,
आज तेरे शहरे मकाम का,
इमाम बन गया ।।
यूँ मोड़ पर जिन्दगी ,
कुछ अल्फाज़ माँगती है,
तुमसे कुछ और नही,
जज्बात माँगती है ,
यूँ तो काट लेंगे ,
हर रात तन्हाई में ,
हम तो सिर्फ ,
यादों के,
अलफ़ाज़ मांगते है ।।
श्री
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