Monday, October 31, 2016

याद

इनायत आँखों में,
कुछ गुजरी बात आई ,
आज खुली आँखों में भी ,
आपकी याद आई ।

जज्बात थे फलक साफ़ थे,
थोड़े खारे बूँद की बाढ़ आई,
अमावस की रात है ,
न चाँदनी की अहसास है ,
फिर भी बार बार आई ,
आपकी याद आई |

कुछ गम के लबादों सा,
अंधेरों में उजालों सा,
कुछ देर तलक खामोश,
सुहानी रात में,
अमावस सी रात में,
फिर उन लम्हों में,
वही रात आई,
आपकी याद आई.....

1 comment:

  1. उनकी याद ही तो चांदनी है ... उसका एहसास है ...
    बहुत खूब ...

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