एक उम्र तक जज्बात साथ रखते हो ,
एक पल में अकेला छोड़ जाते हो ।
कसूर क्या है , मेरी मोहब्ब्त का
अक्सर महफिल में अकेला छोड़ जाते हो ।
मोहब्ब्त तुमसे है खूब है । खबर है तुमको
फिर भी मायूस मुझे तन्हा छोड़ जाते हो ।
कभी सपनों का महल ,तो कभी आंसुओं की फरियाद है | कभी रेत की ढेर सी खामोश ,तो कभी पेड की छाँव है ये जिंदगी || कभी गीता की पाठ ,तो कभी कुरान की आयात है | एक कारवाँ सपनों का बागबाँ ,तो कभी माझी की नैया और पतवार है ये जिंदगी || कभी काँटों का दामन , कभी जश्ने बहार है| शांति की वीणा ,तो कभी लहू की ललकार एक आवाज़ है ये जिंदगी || कभी ममता की छाँव कहीं ,तो कभी करुणा की तस्वीर है | आने वाले जीवन की, अनुभवों की गीत है ये जिंदगी || -श्रीकुमार गुप्ता
ख्वाब की परी
यूँ ही हम अक्सर ,
एक ख्वाब से ,
मंजिल की तलाश में
एक नाव से
अधूरे अधूरे अहसास से
अधूरे अधूरे कहानीकार से
एक मंच दो कलाकार से
कहानी के अलग किरदार से
थकान में , जरूरत में
पास पास से ,
उजियारी अंधियारी दुनिया में
साथ साथ से
नदी में किनारों में
साथ साथ से
एक दुआ एक अहसास में
साथ साथ से