A LETTER TO GOD
सेवा में ,
मेरे ईश्वर
कुछ चेतनाएँ जीवन की अतीत में झांकते हुए उन अनंत सोंच के बाद मेरे मनोभावों में जागृत एक प्रसस्त्र पुँज रूपी ज्योति प्रगट हुई है | आधा अधुरा ज्ञान है , पर पता नहीं क्यों सोंचता हूँ ,ये ज्ञान पूर्ण हो पाए भी या नहीं | कभी यूँ लगता है , मै तन्हा इन कठनाइयों को सह पाऊंगा भी कि नहीं | हो सकता है ये सम्भव न हो ,मै लडूंगा और अंततः जीतूँगा , ये वादा है | ये जिन्दगी निरंतर हर पल हर क्षण ये संघर्ष मेरी जिन्दगी है | क्या करूं जीतना तो है ,सो जीत कर ही दम लूँगा | लोग कहते है ,जिन्दगी की कहानी अधूरी होती है पर मेरी कहानी पूरी होगी | और ये कटु सच्चाई से प्रेरित होगी | क्योंकि ये मेरी जिन्दगी की कहानी है |
प्रार्थी-
श्रीकुमार गुप्ता

