Thursday, April 16, 2015

जरूरत #शेर

दिए मन्नतों के,
जलाते रहिए,
कुछ देर के लिए ही सहीं,
अँधेरे मिटाते रहिए,
बड़ी रँगी है ,
ये जिन्दगी,
अपनी नाव दरिया में,
चलाते रहिए ||

जब चलता हूँ भोपाल की झीलों के किनारे,
अरपा का वो किनारा याद आता है,
जिस राह पर छोड़ आया हूँ अपनी जिन्दगी,
वो बसेरा याद आता है ||

लाख सितम हो मोहब्बत में श्री
जेब में अगर पैसे न हो तो सितम गहरा होगा ||

हम चुप रहते हैं
दुनिया से कभी न कहते हैं
कभी आओ फुर्सत से बैठो
जानोगे इतनी सिद्दत से तुम्हे याद कैसे किया करते है ||

तेरी महफिल सुनी आज भी है ,
चाहे दिए कितने भी रोशन क्यों न हो,
दिल में अंधियारी आज भी होगी,
तेरी बेवफाई का सिला ही कहलो,
कल तक तजुर्बे लिया करते थे,
आज दिया करते है ||


कौन कहता है मोहब्बत नही बिकते दोस्त,
मैंने अमीरों के दरबार में मोहब्बत को नाचते देखा है || 

आंबेडकर जयंती

मै अम्बेडकर जयंती जरुर मनाता हूँ ,
जब याद आती है general की कम होती सीटें ,
St Sc के रोज बढ़ते आरक्षण ,
अपनी अच्छाइयों को दिया दिखता हूँ ,
मै अम्बेडकर जयंती जरुर मनाता हूँ ||


पश्चाताप के आंसू लिए ,
सामान्य वर्ग होने पर लानत लगता हूँ ,
गम में डूबा अपने हालात के पन्ने याद दिलाता हूँ,
मै अम्बेडकर जयंती जरुर मनाता हूँ ||

IIT की सीट लिए,
अपने आमिर जनजातीय दोस्तों को याद करता हूँ ,
हाँ मै सामान्य वर्ग का नागरिक,
अम्बेडकर जयंती जरुर मनाता हूँ ||

Wednesday, March 25, 2015

प्यारी बिटिया# 28

मुस्कुराती नन्ही परी
अरमानो का दिया
देवी की मूरत कहूँ
या सितारों का टुकड़ा
इतनी प्यारी है
प्यारी बिटिया

किस्मत वालों के नसीब में
ये प्यारी बिटिया
नसीबों की फुल है ये
मन्नतों का दिया
बरकतों का समुंदर है
और रौनक का कँवल
मुबारक हो तुमको
प्यारी बिटिया

काश की तुम समझ सको
हैवानियत का गणित हल कर सको
अपने सूखे दिए को रोशन कर सको
किसी से कम नही है ये बिटिया
सब की लाडली है ये बिटिया
जीवन की अमृत है
प्यारी बिटिया




मौसम है शायराना

धुंधली धुंधली हो चली अपनी मोहब्बत की कस्ती
वक्त पूछता है मरहम किसके थे और घाव किसके


मोहब्बत न सही मेरी मौत बेहतर हो
शायद मेरी तकलीफ से तुझे चैन आ जाये


तुझ से मिलना मुकम्मल न सहीं
पर तुझ से जुडी हर यादें
मेरे अतीत को सजदा करती है
सूख गयी वो गुलाब की कली
जिनमे तेरे प्यार की कसक आज भी है

अश्क तुझ से ज्यादा
हमने बहाए हैं दोस्त
शायद वक्त के थपेड़ों में
अपनी मजिल की तलाश में
तुमने उन्हें न देखा


तलाश गर वफा की करती हो,
मै अधूरा सा पन्ने तेरे मोहब्बत के,
जला आया हूँ ,
इसे मेरी मोहब्बत का सिला ही कहलो,
आज उसी राख से ,
गंगा में तेरा नाम बहा आया हूँ ||


कारवां है की थमता नही
आज हम गुलजार हो चले
आसन सा सफर कठिन हो चला
बस तकलीफ है की
सफर में तेरा साथ नही 

Monday, January 5, 2015

छेरछेरा तिहार छत्तीसगढ़ी

ये असली तिहार हे हमर संगी
 छेरछेरा रे संगी
 किसान के होगे बेरा
 फसल कटा गे
 जम्मो संसो लुआ गे
 मुउहा के मस्ती किसान के बस्ती
 अन्नपूर्णा देवी के किरिया
 दिवाली के दिया बूता गे
 होली के सब रँग छुटा गे
 जब आगे छेरछेरा के रतिहा
 कोठा के धान भरा गे
 घर मा लक्ष्मी मा आगे
 अमर हो गे छत्तीसगढ़ के भुइहाँ
 दे के अन्न के दान मन ला तृप्ति मिल गे
 तन ला अमृत मिल गे
 ये जोहार हे संगी
 ये छत्तीसगढ़ के सबले बड़े तिहार हे संगी
 श्री

Saturday, January 3, 2015

LETTER TO LOVE

तेरी प्यारी आँखों और मुस्कुराहट पे
पूरी कायनात कम लगती है,
काश की हम,
जिम्मेदारी से रुखसत,
कुछ पल साथ गुजारें,
 बीती भूलों को सुधारें ,
कुछ अफसाने तुम कहो,
कुछ हम सुनाएँ ,
जीवन तो जल धारा,
जानेकब तक साथ,
गर मुमकिन हो,
हमेशा साथ रहो,
बिन तेरे मैं कुछ नहीं,
बिन तेरे मैं कुछ भी नही
श्री


Thursday, November 13, 2014

आइना ऐ जिन्दगी


फिर से मुक्तसर  हुई अंधियारी,
गुलाबी कलियों ने ली अंगड़ाई,
सूरज पूर्व से परिलक्षित हुआ,
सवेरा हो गया मेरे  भाई ||

वक़्त रुकता नही कभी मुड़ के देखो तो,
धुआं है सराबोर,
आफतों और भागमभाग में,
अपने कायनात के लिए मुहरें जुटाता हूँ,
पीछे मुड़ उस धुंए का इंतजार करता हूँ ||

न  मिले मिट्टी जिसे शान ए हिन्दुस्तान की,
तकल्लुफ  मरना भी जीने से बेहतर है,
कह गए वतन के शेर ए शहीद,
मिट्टी तेरा कर्ज न चुका पाउँगा ||

शाम आती है तमन्ना लेकर,
तेरी मुलाकात से त्वाज्जुब है,
सरे राह फिरते तेरी आरजू लिए,
गम के बदल भी घिर आते है आँधियों संग,
फिर भी मुमकिन खड़े है तेरे इंतजार में ||

खतों से बनती नहीं बात,
तन्हाई के आलम में,
गुजरते है फूलों से फिर भी,
बंजर रेगिस्तान लगता है ||

रात है वीरानी अभी है,
शायर हैं हम,
ये लम्हे जवां है,
महफिलें सजे या न सही,
इन लम्हों में हंसी सपने जवां है ||

लुहारों की बस्ती में,
सोने नहीं बिकते दोस्त,
फिर हम तो हीरे हैं,
जिसकी चमक भी न देखी हो,
उसने कभी ||

तू ही दिलकश है हमारी नजरों में,
कभी जमीं पे उतर ऐ नजमी,
तेरे हर सपनों को हकीकत कर दूंगा,
ये वादा रहा ||

आज भी अधूरी है ये शाम हमारी,
उलझनों से गुजर मंजिल की आस में,
कह गये वो हमसे,
जीना इसी का नाम है ||

कल होगी फिर से रोशन ऐ दुनिया,
आपकी यादों में फिर तोड़ेंगे चाँदनी,
गर सच्चा है प्यार हमारा,
दिख जायेंगे सितारों में कहीं ||

ऐ बारिश,
तुझ से एक गुजारिश है,
मेरी सितम में कोई न है रोने वाला,
तू कुछ देर और ठहर ||
 
अधूरी अधूरी सी है ये दास्ताँ ने मोहब्बत,
लव तेज न सहीं पर देर तक जलती है ||

नवाबियत तो अस्क बन ढह जाएगी,
एक किताब बन सिमट जाएगी,
कभी खुद को आईने में देख ऐ नवाब,
तेरी फितरत की तर्ज तेरी दुनिया भी मिट जाएगी ||

अगर इकरार न करो,
तो अहसान भी न करना,
काँटों पे चल फ़क़ीर सहीं,
हम जिन्दगी तो जी ही लेंगे ||

कभी माझी बन नाव की सेज थामता,
आज मेरे अपने ही मंजिल चले जा रहे है ||

जाने कौन मुकद्दर से सिकंदर गुजरता है,
खड़े है हम कोशिशों की किताब लेकर ||

"श्री"