Sunday, May 7, 2017

दास्ताँ ऐ मोहब्बत#शेर

मैं दास्ताँ बन जाऊंगा ,
तुम्हारी यादों का पुलिंदा लिए ,
ये टिस दिल में होगी फिरभी ,
की मेरी क्या खता थी,
की मेरी क्या खता है ।।

Monday, May 1, 2017

इन्तजार

लौट के आना,
इन्तजार होगा,
तकलीफ खुद की है,
जिगर के पार होगा ,
खुश नसीब हूँ मै ,
रोने की वजह तुम हो ,
कुछ कहना है ,
उस सत्य से ,
तुम बिन जीना ,
आज यलगार होगा,
अब दर्द हर साँस में ,
महसूस होगी ,
ये जीवन तुम बिन ,
प्यासा अहसास होगा ,
ये जीवन तुम बिन ,
बिन मिठास होगा ।।

मेरे प्यार को समझने में ,
उम्र गुजर जाएगी ,
थोड़ा आँसू रो लेना ,
एक झलक नजर जाओगी ।।

एक आहट से जाग जाता हूँ अक्सर ,
इतनी याद की अहसास होती हो ,
थोड़ा मजबूर थे अपनी जिंदगी से  ,
फिर भी अरमान ए जिंदगी तलाशा हमने ।।

वो सत्य है पर सत्य नही समझ पाया ,
तुम मेरी हो अहसास नही कर पाया,
दूर तक तलाशा हर बार ,
जब मिली तो रास्ते बदल गए ।।

मत बोलो आज ,
जी भर के रो लूँ ,
तुम चुप रहो ,
तकलीफ जिगर के ,
खोल लूँ ,
बुरा हूँ मै ,
उस सत्य की किताब में,
तुम ना मिली ,
ये तकलीफ ,
कैसे बोल दूँ ।।

रुक रही है साँसे ,
अब जीना भुल जाऊंगा ,
ये ही सबब है मोहब्बत ,
की तुझमें डूब जाऊंगा ।।

Thursday, April 13, 2017

अभिव्यक्ति#4

आप नही समझोगी,
थोड़ा मुश्किल है ,
किसी को टूट के चाहना,
क्या मुमकिन है,
जीने का कारण ,
पैसों का मोल नही ,
बस सुकून के पल
और थोड़ी प्यारी बात ,
आप नही समझोगी।

शिद्दत का प्यार,
ईश्वर का दीदार,
मुमकिन नही,
पलों को समेटना,
तड़पना पड़ेगा,
बार बार,
आप नही समझोगी ।

हर बात पे
आपकी याद
और वो हँसती
मुस्कान
दिल से निकली
हर आवाज
वो सुबह की
प्यारी बात
हर शाम मुलाकात
वो बहते आँसू
वो फोन की घंटी
आप नही समझोगी ।।

श्री

Friday, April 7, 2017

Smile#शेर

मुस्कुराओ हर लम्हें ,
सँवर जायेंगे ,
तकलीफें लाखो हो ,
रास्ते निकल ही जाएंगे ।।

Tuesday, January 17, 2017

वक़्त#शेर

थोड़ी देर और बस,
रात गुजर जायेगी,
तेरे जज्बात से ,
दिल की आवाज़ निकल जाएगी ।।

बीत जाती है जिंदगी टूट कर,
मै जीत कर भी हार जाता अक्सर ।।

मै जागूँगा तुम्हारी तन्हाई के अस्कों के साथ
जरा हँस दो तो चैन आ जायेगा ।।

शायद मेरे जज्बात कोई समझ जाती है ।
जब मै रोता हूँ उसकी आंखें भर आती है ।

जज्बात यू ही बातों से बयाँ कर जाऊंगा
दूर कितने भी रहो प्यार यू ही कर जाऊँगा ।।

Saturday, November 26, 2016

You#शेर

जिंदगी इशरत में
एक ख्वाब देखा
जागती आँखों में
संसार देखा
कवायद थी
इन्तहा की हद थी
इस हद में
जिंदगी को
गुलजार देखा
आंसू की मोती
आँखों में लिए
मोहब्बत का
मुमताज देखा
शायद इन आँखों ने
तुझमे अपना
संसार देखा

हूनर तेरे मोहब्बत का
कशिश मेरी होगी
आँखें तेरी पर
मोहब्बत मेरी होगी
कभी सुकून से देख
लेना तस्वीर अपनी
चेहरा तेरा
निगाहें मेरी होंगी ।।

फिर यकीन होगी
मोहब्बत की आरजू
तड़पना शायद
पड़ेगा उम्र भर यूँ ही
शिकायत नही
इबादत है
खुदा से फिरभी
तुम फिर भी हो
जरूरत मेरी

मेरे अलफ़ाज़ में मेरी मोहब्बत को पहचान लेना
थोड़ा समझ लो तो अलफ़ाज़ मोहब्बत होंगे ।।

Thursday, November 10, 2016

भगत गांधी#9

इन्कलाब के दिन
न सहीं पर
फिर से ये गीत सुनाऊंगा
जब भगत झूल गए फांसी पर
मै बिस्मिल के गीत सुनाऊंगा ।।

तुम होगे राष्ट्र पिता पर
उस दिन पिता नही बन पाए थे
युवा देश भक्त बेटे की
जान नही बचाए थे

जलीय वाला बाग़ के
मजबूरों को इन्साफ नही
दिलाया था ।
खूब किया ऊधम सिंग ने
जो डायर को मारा था
लहू विरंजित भारत माँ को
सच्चा इन्साफ दिलाया था ।।

करनी तो उनकी भी
हिंसा पर चलती थी
फिर भी पक्ष
अंग्रेजों का ले के
उन बेटों को
नही बचाया था
भारत माँ के बेटों को
शूली पर चढ़वाया था ।।