Thursday, April 13, 2017

अभिव्यक्ति#4

आप नही समझोगी,
थोड़ा मुश्किल है ,
किसी को टूट के चाहना,
क्या मुमकिन है,
जीने का कारण ,
पैसों का मोल नही ,
बस सुकून के पल
और थोड़ी प्यारी बात ,
आप नही समझोगी।

शिद्दत का प्यार,
ईश्वर का दीदार,
मुमकिन नही,
पलों को समेटना,
तड़पना पड़ेगा,
बार बार,
आप नही समझोगी ।

हर बात पे
आपकी याद
और वो हँसती
मुस्कान
दिल से निकली
हर आवाज
वो सुबह की
प्यारी बात
हर शाम मुलाकात
वो बहते आँसू
वो फोन की घंटी
आप नही समझोगी ।।

श्री

Friday, April 7, 2017

Smile#शेर

मुस्कुराओ हर लम्हें ,
सँवर जायेंगे ,
तकलीफें लाखो हो ,
रास्ते निकल ही जाएंगे ।।

Tuesday, January 17, 2017

वक़्त#शेर

थोड़ी देर और बस,
रात गुजर जायेगी,
तेरे जज्बात से ,
दिल की आवाज़ निकल जाएगी ।।

बीत जाती है जिंदगी टूट कर,
मै जीत कर भी हार जाता अक्सर ।।

मै जागूँगा तुम्हारी तन्हाई के अस्कों के साथ
जरा हँस दो तो चैन आ जायेगा ।।

शायद मेरे जज्बात कोई समझ जाती है ।
जब मै रोता हूँ उसकी आंखें भर आती है ।

जज्बात यू ही बातों से बयाँ कर जाऊंगा
दूर कितने भी रहो प्यार यू ही कर जाऊँगा ।।

Saturday, November 26, 2016

You#शेर

जिंदगी इशरत में
एक ख्वाब देखा
जागती आँखों में
संसार देखा
कवायद थी
इन्तहा की हद थी
इस हद में
जिंदगी को
गुलजार देखा
आंसू की मोती
आँखों में लिए
मोहब्बत का
मुमताज देखा
शायद इन आँखों ने
तुझमे अपना
संसार देखा

हूनर तेरे मोहब्बत का
कशिश मेरी होगी
आँखें तेरी पर
मोहब्बत मेरी होगी
कभी सुकून से देख
लेना तस्वीर अपनी
चेहरा तेरा
निगाहें मेरी होंगी ।।

फिर यकीन होगी
मोहब्बत की आरजू
तड़पना शायद
पड़ेगा उम्र भर यूँ ही
शिकायत नही
इबादत है
खुदा से फिरभी
तुम फिर भी हो
जरूरत मेरी

मेरे अलफ़ाज़ में मेरी मोहब्बत को पहचान लेना
थोड़ा समझ लो तो अलफ़ाज़ मोहब्बत होंगे ।।

Thursday, November 10, 2016

भगत गांधी#9

इन्कलाब के दिन
न सहीं पर
फिर से ये गीत सुनाऊंगा
जब भगत झूल गए फांसी पर
मै बिस्मिल के गीत सुनाऊंगा ।।

तुम होगे राष्ट्र पिता पर
उस दिन पिता नही बन पाए थे
युवा देश भक्त बेटे की
जान नही बचाए थे

जलीय वाला बाग़ के
मजबूरों को इन्साफ नही
दिलाया था ।
खूब किया ऊधम सिंग ने
जो डायर को मारा था
लहू विरंजित भारत माँ को
सच्चा इन्साफ दिलाया था ।।

करनी तो उनकी भी
हिंसा पर चलती थी
फिर भी पक्ष
अंग्रेजों का ले के
उन बेटों को
नही बचाया था
भारत माँ के बेटों को
शूली पर चढ़वाया था ।।

Monday, October 31, 2016

याद#6

इनायत आँखों में,
कुछ गुजरी बात आई ,
आज खुली आँखों में भी ,
आपकी याद आई ।

जज्बात थे फलक साफ़ थे,
थोड़े खारे बूँद की बाढ़ आई,
अमावस की रात है ,
न चाँदनी की अहसास है ,
फिर भी बार बार आई ,
आपकी याद आई |

कुछ गम के लबादों सा,
अंधेरों में उजालों सा,
कुछ देर तलक खामोश,
सुहानी रात में,
अमावस सी रात में,
फिर उन लम्हों में,
वही रात आई,
आपकी याद आई.....

Sunday, September 18, 2016

इरादा

तेरी सुभृत को आज ,
सीने से लगा लूँगा ,
तुम किसी की हो ,
तुम्हे अपना ही मानूँगा ।।

इनायत तेरी आँखों में
मोहब्बत देखी,
आइना दिल साफ में,
इबादत देखी ।।

एक राही था मै,
खाकसार बन गया,
जीने की वजह पे ,
तेरा तलबगार बन गया ,
कल तक काफिर था ,
आज तेरे शहरे मकाम का,
इमाम बन गया ।।

यूँ मोड़ पर जिन्दगी ,
कुछ अल्फाज़ माँगती है,
तुमसे कुछ और नही,
जज्बात माँगती है ,
यूँ तो काट लेंगे ,
हर रात तन्हाई में ,
हम तो सिर्फ ,
यादों के,
अलफ़ाज़ मांगते है ।।

श्री