आँखों में इंतजार भरा है ,
खुदा करे वो आ जाये |
कुछ मुद्दतें ख्वाब है ,
उन्हें इसकी खबर हो जाये ||
गुजरे गया वक्त ,
भर गया हर गम ,
इस गम हो कुरेद कर ,
जख्म का दर्द दे जाये |
कुछ मुद्दतें ख्वाब है ,
उन्हें इसकी खबर हो जाये ||
राह तकते है जेठ की धूप में ,
गर्म हवाओं में एक उनका नाम आ जाये |
भरी धूप में दिल रोता कर याद उनको ,
ऐसी धूप में गर उनका दीदार हो जाये |
कुछ मुद्दतें ख्वाब है ,
उन्हें इसकी खबर हो जाये ||
मन्नते करते है साथ जियेंगे ,
खुदा को इस बात की खबर हो जाये |
रोते हैं हर रात जिन्हें याद करके ,
उन्हें भी हमारे प्यार की नजर लग जाये |
कुछ मुद्दतें ख्वाब है ,
उन्हें इसकी खबर हो जाये ||
कभी सपनों का महल ,तो कभी आंसुओं की फरियाद है | कभी रेत की ढेर सी खामोश ,तो कभी पेड की छाँव है ये जिंदगी || कभी गीता की पाठ ,तो कभी कुरान की आयात है | एक कारवाँ सपनों का बागबाँ ,तो कभी माझी की नैया और पतवार है ये जिंदगी || कभी काँटों का दामन , कभी जश्ने बहार है| शांति की वीणा ,तो कभी लहू की ललकार एक आवाज़ है ये जिंदगी || कभी ममता की छाँव कहीं ,तो कभी करुणा की तस्वीर है | आने वाले जीवन की, अनुभवों की गीत है ये जिंदगी || -श्रीकुमार गुप्ता
Wednesday, July 14, 2010
Tuesday, June 1, 2010
CLOSED EYE#18
अंधकार , मन को चोट देता है | हर समय नई सोंच और जिन्दगी जीने का अहसास ख़त्म कर देता है | जिन्दगी बस रेल की पटरी पर दौड़ती है | आज का युग इस बात का साक्षी है | हर पल केवल भविष्य की चिंता वर्तमान का कोई ठिकाना नहीं बस भविष्य शानदार हो | इन हालात को देखकर मन में ये भाव उठते है ............
"अंधकार"
एक सजा बन गयी है जिन्दगी ,
कौन सा इतिहास हम ,
न हमारा वर्तमान पे आधिकार ,
टूटी शाख सी बस जल रही है जिन्दगी ......
कम नहीं है दर्द ,
बस दर्द का ख्याल नहीं रहता |
आँसू बहते है ,
आँसुओं का आहसास नहीं रहता |
कहता हूँ खुश हूँ पर ,
ख़ुशी का अहसास नहीं रहता |
समय नहीं है जीवन में ,
जीने का कोई अहसास नहीं होता |
खबर आती है ,
खुशियों के आने का |
ख़ुशी मनाने का ,
इन्तजार नहीं रहता |
बहुत कमाते है दौलत ,
प्यार कमाने का जमाना नहीं मिलता |
एक नाव पे सवार है ,
अपनी मंजिल का इन्तजार नहीं रहता |
खूब लुटाते है अपनी दौलत ,
प्यार लुटाने का बहाना नहीं मिलता |
कहते है सात जन्म साथ जियेंगे ,
सात कदम चलने का विश्वास नहीं रहता |
- श्रीकुमार गुप्ता
"अंधकार"
एक सजा बन गयी है जिन्दगी ,
कौन सा इतिहास हम ,
न हमारा वर्तमान पे आधिकार ,
टूटी शाख सी बस जल रही है जिन्दगी ......
कम नहीं है दर्द ,
बस दर्द का ख्याल नहीं रहता |
आँसू बहते है ,
आँसुओं का आहसास नहीं रहता |
कहता हूँ खुश हूँ पर ,
ख़ुशी का अहसास नहीं रहता |
समय नहीं है जीवन में ,
जीने का कोई अहसास नहीं होता |
खबर आती है ,
खुशियों के आने का |
ख़ुशी मनाने का ,
इन्तजार नहीं रहता |
बहुत कमाते है दौलत ,
प्यार कमाने का जमाना नहीं मिलता |
एक नाव पे सवार है ,
अपनी मंजिल का इन्तजार नहीं रहता |
खूब लुटाते है अपनी दौलत ,
प्यार लुटाने का बहाना नहीं मिलता |
कहते है सात जन्म साथ जियेंगे ,
सात कदम चलने का विश्वास नहीं रहता |
- श्रीकुमार गुप्ता
Thursday, May 20, 2010
A Drinker's Eye#17
"काश कहीं तुम मिल ....."
टूट गये वो कसमें साकी ,
छुट गये वो रिस्ते साकी |
क्रुन्दन की एक नंत स्वप्न में ,
डूब गया वो जीवन साकी |
झोकें से कर करुण वंदना ,
सेज सकून कर जीवन साकी |
जाने कैसे रक्त नीर से ,
खेल रहा हो जीवन साकी |
तेज राह पर थामे श्रृष्टि ,
क्यों करती वो विचलित साकी |
गलियारों की एक छोर पर ,
जाने क्यों है दृष्टि साकी |
आसमान की थामे बाहें ,
क्यों है आँखे क्रोसित साकी |
Thursday, May 13, 2010
JAB SE TUMKO CHAHA HAI#12
जब से तुमको चाहा है ,
जीवन से बहुत कुछ पाया है ||
{१}
एक आस के जीवन साथ जियें ,
एक आस की सुख दुःख साथ सहें ,
हे प्राण प्रिये जब साथ हो तुम ,
तो क्या इस जग में चाहा है ||
{२}
हो दूर गगन के साये में ,
जब मौत मुझे लेने आये ,
फरियाद ये रब से करता हूँ ,
बाहों में तुम्हारी जीना है ,
बाहों में तुम्हारी मरना है ||
{३}
जीवन एक मिट्टी का घर है ,
एक दिन तो इसे भी ढहना है ,
हे , प्राण प्रिये जब साथ हो तो ,
हर जीवन साथ में जीना है ,
हर जीवन तेरे संग जीना है ||
श्रीकुमार गुप्ता
Thursday, April 29, 2010
MY PARENTS#15
मेरे ईश्वर ....
एक अनछुआ अहसास ,
जब अपनों के पास आ जाये ,
तो क्या बात है ||
जिन्होंने हमें चलना सिखाया ,
उनकी लाठी बन पायें ,
तो क्या बात है ||
जिन्होंने हमे सपने दिखाए ,
उन्हें सुकून की नींद दे पायें ,
तो क्या बात है ||
हर जरुरत को जिन्होंने पूरा किया ,
उनकी जरुरत में काम आ सकें ,
तो क्या बात है ||
जिन्होंने पल पल हमपे कुर्बान किया ,
उनकी खुशियों की नीव बन पायें ,
तो क्या बात है ||
जिनकी गोद में दुनियाँ का सुख पाया ,
उनकी गोद में जहाँ की खुशियाँ दे पायें ,
तो क्या बात है ||
भीड़ में खोये हैं हम भी तुम भी ,
इस भीड़ में अपने माता पिता की ,
हर आवाज सुन सकें ,
तो क्या बात है ||
श्रीकुमार गुप्ता
एक अनछुआ अहसास ,
जब अपनों के पास आ जाये ,
तो क्या बात है ||
जिन्होंने हमें चलना सिखाया ,
उनकी लाठी बन पायें ,
तो क्या बात है ||
जिन्होंने हमे सपने दिखाए ,
उन्हें सुकून की नींद दे पायें ,
तो क्या बात है ||
हर जरुरत को जिन्होंने पूरा किया ,
उनकी जरुरत में काम आ सकें ,
तो क्या बात है ||
जिन्होंने पल पल हमपे कुर्बान किया ,
उनकी खुशियों की नीव बन पायें ,
तो क्या बात है ||
जिनकी गोद में दुनियाँ का सुख पाया ,
उनकी गोद में जहाँ की खुशियाँ दे पायें ,
तो क्या बात है ||
भीड़ में खोये हैं हम भी तुम भी ,
इस भीड़ में अपने माता पिता की ,
हर आवाज सुन सकें ,
तो क्या बात है ||
श्रीकुमार गुप्ता
Thursday, April 15, 2010
बेसबब बात बढ़ जाएगी
बेसबब बात बढ़ जाएगी ....
न सताना इस नाजुक दिल को ,
न मुस्कुराना चौराहे पे देख के मुझको ,
काफ़िर हूँ मै तेरी सुनी गलियों का ,
बेसबब बात बढ़ जाएगी |
न बिछाना राह में टेसू के फूल ,
एक दिन रंगीनियत पे अंधियारी छा जाएगी ,
किस्मत की लकीरों ने लिखे हैं जीवन में काँटे ,
ह्रदय की धड़कन थम जाएगी |
बेसबब बात बढ़ जाएगी .........
न बुनना रिश्तों की माला ,
न करना कच्चे वादे ,
न पुकारना घर की मुँडेर से मुझको ,
तुम दिल में समा जाओगी |
बेसबब बात बढ़ जाएगी .........
न रोना बार बार समझाने पर ,
न आना मिलने सुहानी शाम ढले ,
नित् दिन के वो गुलाब के फूल ,
अमावस पे चाँदनी छा जाएगी |
बेसबब बात बढ़ जाएगी .........
न रचाना हाँथों में मेहँदी प्यार की ,
न दिखाना अधूरे सपने ,
बस दिख जाना शाम को रस्ते पर कहीं ,
गली में उजियाली छा जाएगी |
बेसबब बात बढ़ जाएगी .........
न आना बार बार घर पूछने मुझको ,
न देना जन्म दिवस पे प्यारे तोह्फे ,
ख्याल करना न याद करूँ तुमको ,
प्यारी यादें इस दिल में उतर जाएगी |
बेसबब बात बढ़ जाएगी .........
न लिखना खत प्यार वाले ,
न करना साथ जीने की उम्मीद ,
गर न हुए हम कामयाब ,
मेरी उम्मीदें थम जाएगी |
बेसबब बात बढ़ जाएगी .........
करवटें ले कर कटी है रातें ,
करते हैं साथ जीने मरने के वादें ,
एक आरजू बन मन में रहना ,
ये जान ही निकल जाएगी |
बेसबब बात बढ़ जाएगी .........
न थामना किसी और का हाथ ,
न बसाना किसी और को दिल में ,
दिल में सहेज कर रखा है तुमको ,
कविताओं में मेरी प्रीत अमर रह जाएगी |
बेसबब बात बढ़ जाएगी ............
श्रीकुमार गुप्ता
Thursday, April 8, 2010
नक्सलवाद (naxalism )34
नक्सलवाद
लहू की गंगा
और ख़ूनी आँख ,
इसी का नाम है
नक्सलवाद |
कहो मारोगे ,
या काटोगे ,
या जिन्दा
जलाओगे |
दल दल हो
तुम,
क्रोध की
अग्नि में,
एक दिन खुद ही
भस्म हो जाओगे |
एक गँदगी हो तुम ,
अपनी गलती दोहराते हो ,
बस भोग विलास के
बहाने तलासते हो |
बदलना चाहते हो सत्ता ,
और सामने आने
से भी घबराते हो |
अपनी ऊँची बातों से ,
भोले ग्रामीणों को
बहकाते हो |
न ये कारवाँ रुकेगा ,
न तुम सफल हो पाओगे ,
एक काले धब्बे से ,
बस अपनी औकात
दिखाओगे |
वो गौरव के सितारे है |
जो शहीद हुए ,
तुम तो बिना कफ़न के ही ,
दफ़न हो जाओगे |
और मिटटी की
गहराई में ,
अपने कोरे अस्तित्व
को पाओगे |
श्रीकुमार गुप्ता
लहू की गंगा
और ख़ूनी आँख ,
इसी का नाम है
नक्सलवाद |
कहो मारोगे ,
या काटोगे ,
या जिन्दा
जलाओगे |
दल दल हो
तुम,
क्रोध की
अग्नि में,
एक दिन खुद ही
भस्म हो जाओगे |
एक गँदगी हो तुम ,
अपनी गलती दोहराते हो ,
बस भोग विलास के
बहाने तलासते हो |
बदलना चाहते हो सत्ता ,
और सामने आने
से भी घबराते हो |
अपनी ऊँची बातों से ,
भोले ग्रामीणों को
बहकाते हो |
न ये कारवाँ रुकेगा ,
न तुम सफल हो पाओगे ,
एक काले धब्बे से ,
बस अपनी औकात
दिखाओगे |
वो गौरव के सितारे है |
जो शहीद हुए ,
तुम तो बिना कफ़न के ही ,
दफ़न हो जाओगे |
और मिटटी की
गहराई में ,
अपने कोरे अस्तित्व
को पाओगे |
श्रीकुमार गुप्ता
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