Thursday, November 10, 2016

भगत गांधी#9

इन्कलाब के दिन
न सहीं पर
फिर से ये गीत सुनाऊंगा
जब भगत झूल गए फांसी पर
मै बिस्मिल के गीत सुनाऊंगा ।।

तुम होगे राष्ट्र पिता पर
उस दिन पिता नही बन पाए थे
युवा देश भक्त बेटे की
जान नही बचाए थे

जलीय वाला बाग़ के
मजबूरों को इन्साफ नही
दिलाया था ।
खूब किया ऊधम सिंग ने
जो डायर को मारा था
लहू विरंजित भारत माँ को
सच्चा इन्साफ दिलाया था ।।

करनी तो उनकी भी
हिंसा पर चलती थी
फिर भी पक्ष
अंग्रेजों का ले के
उन बेटों को
नही बचाया था
भारत माँ के बेटों को
शूली पर चढ़वाया था ।।

Monday, October 31, 2016

याद#6

इनायत आँखों में,
कुछ गुजरी बात आई ,
आज खुली आँखों में भी ,
आपकी याद आई ।

जज्बात थे फलक साफ़ थे,
थोड़े खारे बूँद की बाढ़ आई,
अमावस की रात है ,
न चाँदनी की अहसास है ,
फिर भी बार बार आई ,
आपकी याद आई |

कुछ गम के लबादों सा,
अंधेरों में उजालों सा,
कुछ देर तलक खामोश,
सुहानी रात में,
अमावस सी रात में,
फिर उन लम्हों में,
वही रात आई,
आपकी याद आई.....

Sunday, September 18, 2016

इरादा

तेरी सुभृत को आज ,
सीने से लगा लूँगा ,
तुम किसी की हो ,
तुम्हे अपना ही मानूँगा ।।

इनायत तेरी आँखों में
मोहब्बत देखी,
आइना दिल साफ में,
इबादत देखी ।।

एक राही था मै,
खाकसार बन गया,
जीने की वजह पे ,
तेरा तलबगार बन गया ,
कल तक काफिर था ,
आज तेरे शहरे मकाम का,
इमाम बन गया ।।

यूँ मोड़ पर जिन्दगी ,
कुछ अल्फाज़ माँगती है,
तुमसे कुछ और नही,
जज्बात माँगती है ,
यूँ तो काट लेंगे ,
हर रात तन्हाई में ,
हम तो सिर्फ ,
यादों के,
अलफ़ाज़ मांगते है ।।

श्री

Monday, August 29, 2016

आदत

बंद होठों से जज्बात,
समझ जाते हैं ।।
शायर हैं इशारे,
समझ जाते हैं ।।
मोहब्ब्बत ही है,
हमेशा रहेगी ।।
तुम हमारे,
और हम तुम्हारे ।।
हर इरादे,
समझ जाते है ।।

श्री

Sunday, August 14, 2016

कुछ आँसू#शेर

कसीदें दुवाएँ बहुत हुई ,
मैं मजबूर हूँ मुझे मुमकिन न समझना ,
फिर भी मैं यकीन अल्फ़ाज़ रखता हूँ,
कुछ आँसू तेरे होठों से भी गुजरेंगे ।।

मुकम्मल न हो सकी मोहब्बत ,
लोगों ने बेगाना बना दिया,
तड़पते निकले आँसू ,
मोहब्बत ने दीवाना बना दिया ।।

मुझे तुम अच्छी लगी,
मुस्कुराहट पे मर मिटा,
तेरी कातिल अदाओं ने ,
दीवाना बना दिया ।।

मयस्सर न होगी,
मेरी मोहब्बत इस दौर में ,
दिल की कीमत ने फिर ,
वक़्त को कातिल बना दिया ।।

मेरी भीगीं आँखें आज भी ,
तुझसे सच्ची मोहब्बत करती है,
थोड़ा मजबूर थोड़ा मगरूर हूँ ,
फिर भी मोहब्बत ने मुझे,
परवाना बना दिया ।।

कुछ कदम साथ चलो ,
जन्मो की क्या बात करूं ,
दिल का मरीज नही ,
पर तड़पते दिल ने मुझे,
तलबगार बना दिया ||

Wednesday, August 10, 2016

अनुभव#7

आज लोग बदल गए,
वक्त की रफ्तार कहो,
या मौसम का रुख,
की लोग बदल गए ।

जिन्दगी की गफलत में,
अपनी दुनिया पियोए ,
आँसुओं के बोझ में ,
चेहरे झुलस गए ,
की लोग बदल गए ।

कल तक वफा की बात थी ,
अब जिद हो चली ,
कभी वक्त था की साथ बैठे ,
आज वक्त नही की साथ बोलें,
ये बिसात हो गयी तलब जिन्दगी,
की साथ हम साथ तुम हो गए,
आज लोग बदल गए ।

वक्तसर यूं,
खामोश न रहो,
हिम्मत हो तो,
सच भी कहो,
न मौसम न हवाएं बदली,
न ये वक्त न नियत बदली,
शायद किसी की,
कीमत बदल गयी,
और थोड़े वो बदल गये,
आज लोग बदल गए ।।

यूँ ही तुम भी रोओगे,
हम भी रोएंगे,
तुम जज्बात से,
हम अलफ़ाज़ से,
तुम कुछ तड्पोगी,
थोड़े हम भी तड़प लेंगे,
फिर भी तुम न बदलोगे,
न हम बदलेंगे ,
इन अलफ़ाज़ में शायद,
किसी का दिल जलेगा,
और शायद अल्फाजों में,
वो न बदलेगा,
की लोग बदल गए ,
पर वो न बदलेगा।
पर वो न बदलेगा ।।

Tuesday, August 9, 2016

Friend (Amigo) Spanish

दोस्त तू ही था ...
मेरी तकलीफ में,
मेरी गरीबी में,
चिल्हर लिए,
चने की दूकान में,
फेल खड़े,
आखिरी बेंच में
दोस्त तू ही था ।।..

मेरे स्कूल में,
शहर की तकलीफ में,
भीगे आँखों में,
जब सब चले गये,
अपने मुह मोड़ लिए,
दोस्त तू ही था ।।

कालेज रैगिंग के दिन,
असहज आंसू में,
हंसी की ठिठोली में,
टपरी पे चाय पीते,
चिल्ल्हर से पेट्रोल लेते,
दोस्त तू ही था ।।

बैक में,
दुःख बाटने,
न घर वाले न रिश्तेदार
बस तू ही था
इंटरव्यू में फ़ैल होते,
छुपे आंसू पोछते ,
ठेले पे धुएं उड़ाते ,
मेरे गम में,
दोस्त तू ही था ।।

रात पढ़ते में,
दिन भर सोते में,
पोहे खाते,
गाड़ी में जाते,
जज्बात सहेजते,
तकलीफ बाँटते,
दोस्त तू ही था ।।

कॉलेज की,
तकलीफ में,
नौकरी की तलाश में,
किसी ख़ास की आस में
दोस्त तू ही था ।।